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नेपाल में हंगामा मचा रहा 100 का नोट! जानें क्यों बालेन शाह की सरकार के खिलाफ भड़के लोग

 Published : Apr 21, 2026 09:59 pm IST,  Updated : Apr 21, 2026 09:59 pm IST

नेपाल की बालेन शाह सरकार पर विवादों में घिर गई है। भारी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए हैं और सरकार का विरोध शुरू कर दिया है। चलिए जानते हैं कि पूरा मामला क्या है।

Nepal PM Balen Shah- India TV Hindi
Nepal PM Balen Shah Image Source : AP

Nepal Protest Against PM Balen Shah: नेपाल की बालेन शाह सरकार को बने हुए अभी कुछ ही दिन हुए हैं और सरकार एक फैसले को लेकर विवादों भी घिर गई है। बालेन शाह सरकार के एक फैसले का काफी विरोध हो रहा है। बालेन सरकार ने भारत से लाए जाने वाले 100 नेपाली रुपये से अधिक कीमत के सामान पर कस्टम ड्यूटी लागू कर दी है। भारत से लाए जाने वाले सामान पर टैक्स की बात परलोग भड़क गए हैं और प्रदर्शन शुरू कर दिया है। लोग सरकार के इस फैसले को वापस लेने की मांग कर रहे हैं।

कब लागू हुआ नियम?

कस्टम ड्यूटी वाला नियम एक अप्रैल से लागू किया गया है। नेपाल के सीमा शुल्क विभाग के अनुसार, यह नियम नया नहीं है, लेकिन पहले स्थानीय अधिकारियों को छोटे सामान पर छूट देने की विवेकाधीन शक्ति थी। अब बालेन शाह सरकार के निर्देश पर सशस्त्र प्रहरी बल (APF) और राजस्व टीमों ने सीमा चौकियों पर सख्त निगरानी बढ़ा दी है। किराना सामान, कपड़े, घरेलू सामान, दाल, चीनी, सब्जियां और अन्य रोजमर्रा की चीजें ड्यूटी लगाई जा रही है जिससे लोगों की परेशानी बढ़ गई है।

भारत पर निर्भर है नेपाल

नेपाल सरकार के खिलाफ सबसे उग्र विरोध तराई क्षेत्र में दिख रहा है, खासकर बीरगंज में। यहां के स्थानीय निवासी, मधेशी समुदाय और व्यापारी सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि रोजमर्रा की जरूरतों के लिए नेपाल भारत पर निर्भर है। यह फैसला अघोषित नाकेबंदी जैसा है। बीरगंज और अन्य सीमा बाजारों में लंबी कतारें लग रही हैं। लोग छोटी-छोटी खरीदारी के लिए भी परेशान हो रहे हैं। कुछ प्रदर्शनकारियों ने इसे लूट बताया है।

Nepal Protest
Image Source : INDIA TVNepal Protest

नेपाल के विपक्षी दलों ने सरकार को घेरा

भारतीय सीमा से सटे बिहार और उत्तराखंड के व्यापारियों पर भी इसका असर पड़ा है। व्यापारियों का कहना है कि पहले की तुलना में अब स्थिति बदल गई है। नेपाली कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने सरकार के इस कदम की आलोचना की है। कांग्रेस ने बयान जारी कर कहा है कि यह फैसला सामाजिक न्याय और देश की एकता के खिलाफ है। मधेश क्षेत्र के युवाओं और कुछ सत्ताधारी सांसदों ने भी छूट की मांग की है। काठमांडू में भी विरोध प्रदर्शन हुए हैं। लोग कह रहे हैं कि सीमावर्ती जिलों में रहने वाले गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है।

सरकार का पक्ष

सरकार का तर्क है कि यह कदम राजस्व बढ़ाने और तस्करी रोकने के लिए उठाया गया है। सीमा शुल्क महानिदेशक श्याम प्रसाद भंडारी ने कहा कि पहले अनौपचारिक छूट के कारण राजस्व की काफी हानि हो रही थी। नई सरकार का लक्ष्य घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देना, आयात पर निर्भरता कम करना और अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। नेपाल का भारत के साथ व्यापार घाटा काफी बड़ा है और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव है। अधिकारी मानते हैं कि सख्ती से लागू किए गए नियम से लंबे समय में फायदा होगा। हालांकि, आलोचक कहते हैं कि अचानक सख्ती बिना किसी तैयारी या छूट के लागू करने से आम लोगों को परेशानी हो रही है। 

नेपाल में भड़क सकता है बड़ा आंदोलन

नेपाल सरकार के खिलाफ प्रदर्शन जारी हैं और अगर जल्दी समाधान नहीं निकला तो यह विवाद बड़े आंदोलन में बदल सकता है। यह घटना नेपाल की नई सरकार की पहली बड़ी परीक्षा साबित हो रही है। बालेन शाह की लोकप्रियता युवाओं और बदलाव चाहने वालों के बीच काफी है, लेकिन आर्थिक फैसलों में संतुलन बनाए रखना उनके लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। 

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